
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा संयुक्त असैनिक सेवा (पीटी) परीक्षा-2025 का परिणाम जारी कर दिया गया है। लेकिन इस बार परिणाम घोषित होते ही कई विवाद सामने आ गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग ने परिणाम तो जारी कर दिया, लेकिन न तो कटऑफ अंक सार्वजनिक किए और न ही परिणाम दस्तावेज पर आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया से लेकर अभ्यर्थियों के बीच इस परिणाम को लेकर लगातार चर्चा और सवाल उठ रहे हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 103 राजपत्रित पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा में 2204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया है। हालांकि, आयोग की ओर से यह नहीं बताया गया कि किस श्रेणी में कितने अंक पाने वाले उम्मीदवार सफल हुए। पिछले वर्षों में JPSC प्रत्येक परिणाम के साथ सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस वर्ग की कटऑफ सूची भी जारी करता रहा है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया।
क्या है पूरा विवाद?
रिजल्ट जारी होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि परिणाम दस्तावेज पर आयोग के किसी सदस्य के हस्ताक्षर नहीं हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चयन प्रक्रिया से जुड़े कुछ सदस्यों ने हस्ताक्षर नहीं किए। हालांकि JPSC ने इस विषय पर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
दूसरी ओर, आयोग के सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में कहा गया है कि चयन प्रक्रिया को लेकर सदस्यों के बीच मतभेद होने की भी चर्चा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कटऑफ जारी नहीं होने से क्यों बढ़ी परेशानी?
कटऑफ किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी होती है। इससे अभ्यर्थियों को यह पता चलता है कि विभिन्न श्रेणियों में चयन का आधार क्या रहा। इस बार कटऑफ जारी नहीं होने से हजारों उम्मीदवार यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उनका चयन क्यों नहीं हुआ या चयनित उम्मीदवारों का स्तर क्या रहा।
पिछले वर्षों में आयोग ने परिणाम के साथ कटऑफ अंक भी सार्वजनिक किए थे। उदाहरण के तौर पर, पहले की परीक्षाओं में सामान्य वर्ग, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए अलग-अलग कटऑफ जारी किए गए थे। इस बार ऐसा नहीं होने से पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पूर्व सदस्य ने भी उठाए सवाल
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, JPSC के एक पूर्व सदस्य ने भी इस परिणाम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आयोग के किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में सदस्यों की भूमिका अहम होती है और यदि हस्ताक्षर नहीं हैं तो इस पर स्पष्टीकरण आना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग को पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनानी चाहिए ताकि अभ्यर्थियों के मन में किसी प्रकार का संदेह न रहे।
मुख्य परीक्षा के लिए बहुत कम समय
परिणाम जारी होने के साथ ही मुख्य परीक्षा का कार्यक्रम भी घोषित कर दिया गया है। आयोग के अनुसार मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन 3 जुलाई से शुरू हो गए हैं और 9 जुलाई तक आवेदन लिए जाएंगे। इसके बाद 18, 19 और 20 जुलाई को मुख्य परीक्षा आयोजित की जाएगी।
अभ्यर्थियों का कहना है कि मुख्य परीक्षा की तैयारी, आवश्यक दस्तावेज तैयार करने और आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए उन्हें बहुत कम समय मिला है। कई उम्मीदवारों का कहना है कि आय, जाति, निवास, ईडब्ल्यूएस और अन्य प्रमाणपत्र इतने कम समय में तैयार कराना आसान नहीं है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी हुआ परिणाम
रिपोर्ट के अनुसार, इस परीक्षा को लेकर पहले मॉडल उत्तर कुंजी और अभ्यर्थियों की आपत्तियों को लेकर मामला न्यायालय तक पहुंचा था। इसके बाद 30 जून को हाईकोर्ट ने परिणाम जारी करने का निर्देश दिया, जिसके बाद आयोग ने 3 जुलाई को परिणाम घोषित किया।
अभ्यर्थियों की मांग
रिजल्ट जारी होने के बाद अभ्यर्थी आयोग से निम्नलिखित मांग कर रहे हैं—
सभी श्रेणियों की कटऑफ सूची सार्वजनिक की जाए।
परिणाम से संबंधित आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाए।
यदि आवश्यक हो तो चयन प्रक्रिया की पूरी जानकारी साझा की जाए।
मुख्य परीक्षा के लिए पर्याप्त समय दिया जाए ताकि सभी उम्मीदवार समान अवसर के साथ परीक्षा में शामिल हो सकें।
आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल JPSC की ओर से कटऑफ जारी न करने और परिणाम पर उठ रहे सवालों को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में हजारों अभ्यर्थियों की नजर अब आयोग के अगले कदम और संभावित स्पष्टीकरण पर टिकी हुई है।
