
झारखंड मंत्रालय में आयोजित नव नियुक्त इंटर एवं स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्यों के नियुक्ति-पत्र वितरण समारोह में मुख्यमंत्री Hemant Soren ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज और राज्य के विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। समारोह का माहौल उत्साह, उमंग और गौरव से भरा रहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने नवनियुक्त कर्मियों से अपील की कि वे गाँव-गाँव और घर-घर जाकर सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करें। खासकर महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकता बनाएं।

उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं, जबकि महिला पर्यवेक्षकाएं महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से रोजगार उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड सरकार ने पिछले चार महीनों में शिक्षा विभाग में 9 हजार से अधिक तथा पिछले दो वर्षों में 16 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने मंईयाँ सम्मान योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत राज्य की लगभग 60 लाख महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज झारखंड की बेटियां कलेक्टर जैसे पदों तक पहुंच रही हैं, जो राज्य के लिए गर्व की बात है।

मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त शिक्षकों से दुर्गम क्षेत्रों में जाकर बच्चों के भविष्य को संवारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, जिन्हें सही दिशा देकर बेहतर भविष्य दिया जा सकता है। कुपोषण जैसी समस्याओं को खत्म करना भी हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर राज्य के वित्त मंत्री Radha Krishna Kishore, श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के मंत्री Sanjay Prasad Yadav, मुख्य सचिव Avinash Kumar सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में नवनियुक्त अभ्यर्थी मौजूद रहे।












