RIMS में फिर छात्र की आत्महत्या, मेडिकल छात्रों में बढ़ता डिप्रेशन बना चिंता

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रांची स्थित Rajendra Institute of Medical Sciences में MBBS द्वितीय वर्ष के एक प्रतिभावान छात्र की आत्महत्या के बाद पूरे मेडिकल कॉलेज परिसर में शोक और चिंता का माहौल है। 16 मई को हुई इस घटना के बाद रिम्स बॉयज हॉस्टल में अब भी सन्नाटा पसरा हुआ है और छात्र अपने साथी को खोने के सदमे से उबर नहीं पाए हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर NEET जैसी कठिन परीक्षा पास कर देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में दाखिला लेने वाले छात्र इतने मानसिक दबाव में क्यों आ जाते हैं कि आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं।


रिम्स के डीन (स्टूडेंट्स वेलफेयर) डॉ. शिव प्रिय ने स्वीकार किया कि मेडिकल की पढ़ाई, खासकर MBBS में लगातार बेहतर प्रदर्शन का दबाव छात्रों पर रहता है। उन्होंने बताया कि रिम्स में MBBS प्रथम वर्ष से लेकर पीजी तक लगभग हर बैच में कुछ छात्र डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। कई छात्रों का इलाज Central Institute of Psychiatry और रिनपास में भी चल रहा है।


डॉ. शिव प्रिय के अनुसार, सिर्फ कठिन पढ़ाई ही नहीं बल्कि पर्सनल लाइफ और रिलेशनशिप से जुड़ी समस्याएं भी छात्रों में तनाव और डिप्रेशन की बड़ी वजह बन रही हैं। उन्होंने कहा कि यह उम्र भावनात्मक रूप से बेहद संवेदनशील होती है और छात्र अक्सर मानसिक दबाव में टूट जाते हैं।


उन्होंने बताया कि नेशनल मेडिकल काउंसिल की गाइडलाइन के अनुसार हर छात्र के साथ एक फैकल्टी मेंटर को जोड़ा जाता है और समय-समय पर काउंसलिंग भी कराई जाती है। इसके बावजूद कुछ मामलों में छात्रों की परेशानी समय रहते सामने नहीं आ पाती।


रिम्स प्रबंधन अब योग और मेडिटेशन जैसी गतिविधियों को नियमित रूप से शुरू करने की तैयारी में है ताकि छात्रों का मानसिक तनाव कम किया जा सके।

वहीं रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के साथ लगातार संपर्क में रहें। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों के व्यवहार में कोई असामान्य बदलाव दिखे तो तुरंत कॉलेज प्रबंधन को सूचना दें ताकि समय रहते मदद पहुंचाई जा सके।


गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में रिम्स में मेडिकल छात्रों की आत्महत्या के कई मामले सामने आ चुके हैं। अक्टूबर 2024 में प्रेम प्रसंग से जुड़ा मामला सामने आया था, जबकि नवंबर 2023 में एक मेडिकल छात्र का जला हुआ शव मिला था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है।

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