JJM 2.0: झारखंड और केंद्र सरकार के बीच MoU साइन, जल जीवन मिशन के लिए ₹2,500 करोड़ आवंटित

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रांची, 02 जून 2026: जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत झारखंड सरकार और भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने की, जबकि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

समारोह की शुरुआत केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल और झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद के बीच अभिवादन आदान-प्रदान से हुई। कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री वी. सोमन्ना, मंत्रालय के सचिव, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के प्रबंध निदेशक सहित केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक में बताया कि वर्ष 2019-20 से राज्य में जल जीवन मिशन के तहत कुल ₹24,635 करोड़ की लागत वाली पेयजल योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने मल्टी विलेज स्कीम (MVS) और सिंगल विलेज स्कीम (SVS) के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में अब तक लगभग 55 प्रतिशत परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में केंद्र सरकार से पर्याप्त धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने लगभग ₹6,500 करोड़ की लंबित सहायता राशि जल्द जारी करने का अनुरोध किया। साथ ही विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों से परियोजनाओं के लिए समय पर NOC उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया

बैठक में राज्य सरकार ने बताया कि गांवों में जलापूर्ति योजनाओं के सुचारु संचालन के लिए जल सहिया की नियुक्ति की गई है, जिन्हें प्रति माह ₹2,500 की सहायता राशि दी जा रही है। इस व्यवस्था के लिए केंद्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा जताई गई।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने स्पष्ट किया कि रेट्रोफिटिंग और नियमित संचालन एवं रखरखाव (O&M) के लिए केंद्र सरकार की ओर से कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके लिए 16वें वित्त आयोग के तहत पंचायती राज संस्थाओं को मिलने वाले अनुदान का उपयोग किया जा सकता है।

बैठक के दौरान झारखंड के लिए विशेष रूप से ₹2,500 करोड़ की राशि आवंटित करने की जानकारी दी गई। साथ ही जिलाधिकारियों को जल जीवन मिशन परियोजनाओं की निगरानी में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए। ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा करने का भी निर्णय लिया गया।

बैठक का समापन जल जीवन मिशन 2.0 के दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन और सभी ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ।

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