JSSC-CGL: सरकार की ओर से सीलबंद रिपोर्ट दाखिल, गुरुवार को फिर होगी सुनवाई

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रांची: JSSC-CGL (विज्ञापन संख्या 10/2023) समेत अन्य नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में सीलबंद रिपोर्ट दाखिल की गई। इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले को सही ठहराया। सरकार की ओर से कहा गया कि जांच में परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितता के तथ्य सामने आए हैं। मामले में अब तक 28 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच अभी जारी है।

सरकार की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि परीक्षा में अनियमितता के साथ-साथ वित्तीय लेन-देन के तथ्य भी सामने आए हैं। जांच जारी रहने के कारण दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग-अलग करना फिलहाल संभव नहीं है।

याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा रद्द करने पर उठाए सवाल

वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन ने दलील दी कि JSSC-CGL परीक्षा में किसी परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र लीक होने का प्रमाण नहीं मिला है। उनके अनुसार यह संभावित प्रश्नों को लेकर मामला था। दलील दी गई कि नेपाल में 28 अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्न रटाए गए थे, जिनमें से 10 अभ्यर्थी सफल हुए थे।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि इन 10 अभ्यर्थियों का रिजल्ट जारी नहीं करने का आदेश पहले ही हाईकोर्ट ने दिया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा था। ऐसे में पूरी परीक्षा रद्द करने का सरकार का फैसला उचित नहीं है।

अदालत को यह भी बताया गया कि SIT की जांच दो साल से अधिक समय से चल रही है, लेकिन अभी तक आरोप पत्र दाखिल नहीं हुआ है। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब जांच अभी पूरी नहीं हुई है और दोषी एवं निर्दोष अभ्यर्थियों की पहचान अलग-अलग नहीं हुई है, तो पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करना कैसे उचित है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी दिया हवाला

कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील भी दी गई कि JSSC-CGL मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश दे चुके हैं। अदालत को गलत और सही अभ्यर्थियों के बीच अंतर करने तथा नियुक्तियों को आपराधिक कार्रवाई के परिणाम से जोड़ने का निर्देश दिया गया था।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने आंदोलनकारी छात्रों को संतुष्ट करने के लिए JSSC-CGL की नियुक्ति रद्द की है और ऐसा करना पूर्व में दिए गए न्यायिक निर्देशों के विपरीत है।

22 परीक्षाएं रद्द, 6 की प्रक्रिया स्थगित

गौरतलब है कि CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी। साथ ही वर्ष 2014 से हुई नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने का भी फैसला लिया गया था।

इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से संबंधित अधिसूचनाएं जारी की गईं। इनमें 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का उल्लेख किया गया है।

अब इस मामले में हाईकोर्ट में गुरुवार को फिर सुनवाई होगी।

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