
“एक ऐसा नेता… जो कभी NDA में… कभी विपक्ष में… फिर भी हर बार सत्ता में! क्या ये सिर्फ राजनीति है… या एक मास्टरमाइंड गेम? आज जानेंगे पूरी कहानी Nitish Kumar की…
नमस्कार दोस्तों, आज हम बात करेंगे बिहार की राजनीति के सबसे बड़े और अनुभवी चेहरे की, जिनका नाम है नीतीश कुमार।
1 मार्च 1951 को Bakhtiarpur में जन्मे नीतीश कुमार एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता आयुर्वेदिक डॉक्टर थे और परिवार में शिक्षा को बहुत महत्व दिया जाता था। उन्होंने अपनी पढ़ाई Bihar College of Engineering से पूरी की और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बने। लेकिन उनका मन नौकरी में नहीं था, उन्हें कुछ बड़ा करना था।
1974 में जब देश में उथल-पुथल मची हुई थी और JP Movement चल रहा था, उसी समय नीतीश कुमार ने राजनीति में कदम रखा। वे Jayaprakash Narayan से प्रेरित हुए और सिस्टम को बदलने की ठान ली। यही वह मोड़ था जिसने उनके जीवन की दिशा तय कर दी।

धीरे-धीरे वे राजनीति में आगे बढ़े और 1985 में पहली बार विधायक बने। इसके बाद 1989 में वे सांसद बने और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाई। केंद्र सरकार में उन्होंने रेल मंत्री, कृषि मंत्री और सड़क परिवहन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले।
रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने कई सुधार किए, लेकिन एक रेल दुर्घटना के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। यह कदम उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाता है और उनकी ईमानदार छवि को दर्शाता है।
साल 2005 में बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। उस समय राज्य की हालत काफी खराब थी—सड़कें टूटी हुई थीं, अपराध बढ़ा हुआ था और विकास लगभग रुका हुआ था। ऐसे समय में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने और यहीं से शुरू हुआ ‘सुशासन’ का दौर।
उन्होंने सबसे पहले बुनियादी ढांचे पर काम किया। गांव-गांव तक सड़कें बनवाईं, कानून व्यवस्था को मजबूत किया और अपराध पर नियंत्रण पाया। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने लड़कियों के लिए साइकिल योजना शुरू की, जिससे लाखों बेटियों को स्कूल जाने का मौका मिला।

महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। 2016 में उन्होंने बिहार में शराबबंदी लागू की, जो आज भी एक बड़ा और चर्चित फैसला है। इन सभी फैसलों ने बिहार की छवि को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई।
लेकिन नीतीश कुमार की राजनीति का सबसे दिलचस्प पहलू है उनका गठबंधन बदलना। कभी Bharatiya Janata Party के साथ, तो कभी उसके खिलाफ। फिर भी हर बार सत्ता में बने रहना—यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत मानी जाती है। इसी वजह से उन्हें राजनीति का सबसे बड़ा रणनीतिक खिलाड़ी कहा जाता है।
उनकी छवि एक शांत, सादगीपूर्ण और काम करने वाले नेता की है। वे ज्यादा दिखावा नहीं करते, कम बोलते हैं लेकिन अपने फैसलों से असर छोड़ते हैं।

आज भी नीतीश कुमार बिहार की राजनीति का एक बड़ा नाम हैं, जिनका प्रभाव सिर्फ राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी देखा जाता है।
अब सवाल यह है—क्या नीतीश कुमार एक सफल मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने बिहार को बदला, या फिर वे सिर्फ राजनीति के सबसे माहिर खिलाड़ी हैं? अपनी राय जरूर बताइए।”