आदिवासी विद्यार्थियों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच, 31 अक्टूबर तक करें रजिस्ट्रेशन

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रांची: आदिवासी विद्यार्थियों को अपनी इतिहास, विरासत, संस्कृति, परंपराओं, पारंपरिक ज्ञान और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ने के उद्देश्य से प्रथम राष्ट्रीय आदिवासी ओलम्पियाड 2026 का आयोजन किया जा रहा है। आदिवासी विजडम ट्रस्ट एवं टीम धुमकुड़िया की ओर से आयोजित इस राष्ट्रीय शैक्षणिक पहल का सह-संचालन Tribal Matrimony.com कर रहा है। ओलम्पियाड की राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा 29 नवंबर 2026 को देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। इसमें कक्षा 6 से 10 तक के आदिवासी विद्यार्थी भाग ले सकेंगे। पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।

‘The Intellectual Re-awakening of Adivasis’ है ओलम्पियाड की थीम

प्रथम राष्ट्रीय आदिवासी ओलम्पियाड 2026 की थीम ‘The Intellectual Re-awakening of Adivasis’ रखी गई है। इसका उद्देश्य आदिवासी विद्यार्थियों में अपनी जड़ों, ज्ञान परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रति शैक्षणिक रुचि विकसित करना तथा समकालीन विषयों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

ओलम्पियाड में आदिवासी ज्ञान परंपरा, आदिवासी इतिहास, विरासत, संस्कृति, परंपराएं, साहित्य, कला, खेल, पारंपरिक भोजन, संवैधानिक अधिकार, कानून, पर्यावरण, स्वशासन व्यवस्था, महत्वपूर्ण व्यक्तित्व और सामान्य ज्ञान जैसे विषयों को शामिल किया गया है।


देश के कई राज्यों में बनाए जा रहे हैं परीक्षा केंद्र

इस राष्ट्रीय ओलम्पियाड के लिए झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, असम और अंडमान-निकोबार सहित विभिन्न राज्यों एवं क्षेत्रों में परीक्षा केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। आयोजकों की ओर से स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंच बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

ओलम्पियाड में शामिल होने के लिए पंजीकरण शुल्क 300 रुपये निर्धारित किया गया है। पंजीकृत विद्यार्थियों को आधिकारिक तैयारी पुस्तिका, प्रवेश पत्र और डिजिटल सहभागिता प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार, लैपटॉप, टैबलेट और मेरिट प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।


शिक्षा और आदिवासी ज्ञान के विशेषज्ञों का मिल रहा मार्गदर्शन

इस राष्ट्रीय पहल को शिक्षा, मानवशास्त्र, कानून, आदिवासी ज्ञान, साहित्य, सिनेमा, पर्यावरण और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। प्रमुख मेंटरों में कवि एवं लेखक महादेव टोप्पो, डॉ. अभय सागर मिंज, डॉ. मीनाक्षी मुंडा, डॉ. डियोनिस खेस, प्रो. रामचंद्र उरांव, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता निरंजन कुजूर, डॉ. सोनाझरिया मिंज, डॉ. आर.एन. भगत, डॉ. नीलम केरकेट्टा, एल.एम. उरांव, डॉ. हरि उरांव, चित्रकार सी.आर. हेम्ब्रम, संताली लेखक एवं चिंतक भोगला सोरेन, चन्द्रमोहन किस्कू, प्रो. संजीव कुमार बिरुली और गंगा राम गागराई सहित कई विशेषज्ञ शामिल हैं।

विभिन्न राज्यों में गठित की गई आयोजन टीम

इस राष्ट्रीय पहल की रणनीति प्रमुख (Strategy Head) अजय केरकेट्टा हैं। वहीं, प्रचार-प्रसार और आयोजन के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी डॉ. विनीत कुमार भगत के नेतृत्व वाली टीम को दी गई है। इस टीम में झारखंड के विभिन्न जिलों के साथ-साथ ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, असम और अंडमान-निकोबार के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।


आयोजकों ने स्कूलों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों, आदिवासी संगठनों, शिक्षाविदों, सामाजिक संस्थाओं और समुदाय के प्रतिनिधियों से इस पहल से जुड़ने की अपील की है। साथ ही, पात्र विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की इस शैक्षणिक गतिविधि में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया है।

31 अक्टूबर तक कराएं पंजीकरण

प्रथम राष्ट्रीय आदिवासी ओलम्पियाड 2026 में भाग लेने के इच्छुक कक्षा 6 से 10 तक के आदिवासी विद्यार्थी 31 अक्टूबर 2026 तक अपना पंजीकरण करा सकते हैं। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक पहचान, इतिहास, विरासत और पारंपरिक ज्ञान को समझने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी शैक्षणिक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

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