
कांके थाना क्षेत्र के अरसंडे स्थित याशी अस्पताल में सोमवार को इलाज के दौरान एक माह की बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया।
मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल प्रबंधन का आरोप है कि आक्रोशित परिजनों ने डॉक्टर की कार, अस्पताल के शीशे के दरवाजे समेत अन्य सामान क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना की सूचना पर पहुंची कांके थाना की पुलिस ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।

इस संबंध में अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ शशि भूषण प्रसाद ने कांके थाना में आवेदन दिया है। आवेदन के अनुसार पिठोरिया के कांके निवासी आफताब आलम की बच्ची का ओपीडी में इलाज चल रहा था। बच्ची को ब्लड इंफेक्शन था और इंजेक्शन दिए जा रहे थे। सोमवार को इलाज के बाद परिजन करीब 12 बजे बच्ची को घर ले गए। करीब तीन बजे उसे दोबारा अस्पताल लाया गया, जहां जांच के बाद चिकित्सक ने बच्ची को मृत पाया।
इसके बाद करीब 12-14 लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ शुरू कर दी। डॉक्टर के साथ हाथापाई का प्रयास करने, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

इधर, बच्ची के पिता आफताब अंसारी ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बच्ची का इलाज 21 सितंबर से अस्पताल में चल रहा था। डॉक्टर ने 16 इंजेक्शन लिखे थे, जिनमें 14 अस्पताल की नर्स ने दिए, जबकि दो इंजेक्शन बाहर से दिलाए गए।

वही सोमवार को तबीयत बिगड़ने पर बच्ची को अस्पताल लाया गया था। परिजनों के अनुसार डॉक्टर ने बच्ची का शरीर ठंडा पड़ने की बात कही और गर्म सेंक देने के बाद घर भेज दिया। घर पहुंचने के बाद बच्ची की मौत हो गई।

परिजनों का कहना है कि तबीयत गंभीर होने पर बच्ची को दूसरे अस्पताल रेफर किया जाना चाहिए था। इधर, एचबीआई आईएमए के सचिव डॉ शंभू प्रसाद सिंह ने डॉक्टरों के साथ मारपीट और अस्पताल में तोड़फोड़ की घटना को निंदनीय बताया। उन्होंने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और सिक्योरिटी एजेंसी को मजबूत करने की बात कही।