
रांची: Hemant Soren की अध्यक्षता में मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कई अहम निर्देश देते हुए कहा कि विभाग की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने विभाग में रिक्त पड़े पदों को जल्द भरने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि विभाग में सीडीपीओ के 106, महिला पर्यवेक्षिका के 433, आंगनबाड़ी सेविका के 583 और सहायिका के 897 पद रिक्त हैं।
बैठक में मुख्यमंत्री ने मिशन मोड में मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जर्जर और किराए के भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को CSR और DMFT फंड के जरिए बेहतर भवनों में शिफ्ट किया जाए। साथ ही सभी केंद्रों में बिजली, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने सखी वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन के प्रति जागरूकता बढ़ाने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाए और इस व्यवस्था को स्थानीय पुलिस प्रशासन से भी जोड़ा जाए।

बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि गिरिडीह, देवघर और जामताड़ा जैसे जिलों में विशेष अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि बाल विवाह को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई जाए। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया, ऑडियो-वीडियो अभियान और स्कूल-कॉलेज स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए।

इसके अलावा बैठक में मुख्यमंत्री सर्वजन पेंशन योजना, मईयां सम्मान योजना, सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना और दिव्यांग कल्याण योजनाओं की भी समीक्षा की गई।

बैठक में मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, विकास आयुक्त श्री अजय कुमार सिंह, महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव श्री उमा शंकर सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।