
रांची: राजधानी रांची में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा में रविवार को आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब देखने को मिला। कथा स्थल पर अनुमानतः लगभग आठ लाख श्रद्धालु पहुंचे और भगवान शिव की महिमा का श्रवण किया। पूरा पंडाल “हर हर महादेव” और “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” के जयघोष से गूंज उठा। पूज्य गुरुदेव के भावपूर्ण प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति और धर्म से गहराई से जोड़ दिया।

कथा के दौरान गुरुदेव ने पशुपति व्रत के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया व्रत जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को दूर कर सकता है। उन्होंने अपने प्रसिद्ध संदेश “एक लोटा जल सब समस्याओं का हल” के माध्यम से कई प्रेरणादायक प्रसंग सुनाए।

गुरुदेव ने धनबाद निवासी एक व्यक्ति की कथा सुनाई, जिसकी किडनी गंभीर रूप से खराब हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि उस व्यक्ति ने पूर्ण श्रद्धा के साथ पशुपति व्रत किया और भगवान शिव की कृपा से उसकी किडनी स्वस्थ हो गई। यह प्रसंग सुनकर कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे।

इसके अलावा पुलिस सेवा की तैयारी कर रही दो युवतियों का उदाहरण देते हुए गुरुदेव ने कहा कि मेहनत के साथ यदि भगवान शिव की कृपा जुड़ जाए तो सफलता निश्चित हो जाती है। उन्होंने युवाओं को परिश्रम और भक्ति दोनों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

कथा का सबसे भावुक क्षण तब आया जब एक दंपत्ति ने विवाह के 25 वर्षों बाद पुत्र रत्न प्राप्त होने की अपनी कहानी साझा की। इस प्रसंग ने हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं।

अपने प्रवचन में गुरुदेव ने कहा, “सिद्ध होना सरल है, लेकिन शुद्ध होना कठिन है।” उन्होंने बताया कि मनुष्य को केवल उपलब्धियों के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि अपने विचारों और व्यवहार को भी शुद्ध बनाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान शिव पर चढ़ाया गया जल कभी व्यर्थ नहीं जाता।
कथा के दौरान दुंदुभीनिर्ह्राद वध प्रसंग का भी अत्यंत प्रभावशाली वर्णन किया गया। गुरुदेव ने बताया कि भगवान विष्णु द्वारा हिरण्याक्ष के वध के बाद उसका पुत्र दुंदुभीनिर्ह्राद देवताओं से प्रतिशोध लेने लगा और धर्म को नष्ट करने का प्रयास किया। जब अधर्म बढ़ गया, तब भगवान शिव स्वयं शिवलिंग से प्रकट हुए और दैत्य का संहार किया। मान्यता है कि जिस स्थान पर यह घटना हुई, वहीं व्याघ्रेश्वर लिंग की स्थापना हुई।

गुरुदेव ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि जब-जब भक्त संकट में होते हैं, तब-तब भगवान शिव उनकी रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। सत्य, श्रद्धा और भक्ति ही जीवन का वास्तविक मार्ग है।

पूरे कथा स्थल पर भक्ति और आस्था का अद्भुत माहौल देखने को मिला। श्रद्धालु घंटों तक कथा में डूबे रहे और भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग देने के लिए प्रशासन और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया।
